आग क्या होती है ? जाने आग की उत्पति कैसे हुई और आग पर काबू पाने के उपाय

आग क्या होती है ? जाने आग की उत्पति कैसे हुई और आग पर काबू पाने के उपाय

आग (FIRE) एक ऐसा दहनशील पदार्थो की तेज़ गति का मिश्रण होता है जिसमे ऊष्मा, प्रकाश, और ऐसे बहुत सी गैसों का मिश्रण होता है। इसमे जो भी दहनशील पदार्थ होते है उनकी असुद्धि के कारण आग के रंग और उसकी गति में परिवर्तन आ सकता है। आग का मनुष्य की सांस्कृतिक तथा वैज्ञानिक उन्नति में बहुत बड़ा भाग रहा है। लैटिन में अग्नि को प्यूरस अर्थात्‌ पवित्र कहा जाता है। संस्कृत में अग्नि का एक पर्याय पावक भी है जिसका शब्दार्थ है ‘पवित्र करनेवाला’। अग्नि को पवित्र मानकर उसकी उपासना का प्रचलन कई जातियों में हुआ और अब भी है।

प्राचीन काल मे आग(FIRE) की उत्पाति कैसे हुई

आग की उत्पाति का मूल कारण क्या रहा होगा या सर्वप्रथम आग कैसे उत्पन्न हुई इसका सटीक अनुमान लगाया नही जा सकता परन्तु ऐसा माना जाता है कि आदिम मनुष्यो ने पत्थरों के टकराने से उत्पन्न चिनगारियाँ को देखा होगा। अधिकांश विद्ववानों का मत है कि मनुष्य ने सर्वप्रथम कड़े पत्थरों की एक-दूसरे पर मारकर अग्नि उत्पन्न की होगी। पत्थर से उत्पन्न आग के भी अलग अलग विद्ववानों अलग अलग मत है।

  • आग की घर्षण (रगड़ने की) विधि से अग्नि बाद में निकली होगी। अनुमान है कि पत्थरों के हथियार बन चुकने के बाद उन्हें सुडौल, चमकीला और तीव्र करने के लिए रगड़ा गया होगा। रगड़ने पर जो चिनगारियां उत्पन्न हुई होंगी उसी से मनुष्य ने अग्नि उत्पन्न करने की घर्षण विधि निकाली होगी।
  • घर्षण तथा टक्कर इन दोनों विधियों से अग्नि उत्पन्न करने का ढंग आजकल भी देखने में आता है। अब भी अवश्यकता पड़ने पर इस्पात और चकमक पत्थर के प्रयोग से अग्नि उत्पन्न की जाती है। एक विशेष प्रकार की सूखी घास या रुई को चकमक के साथ सटाकर पकड़ लेते हैं और इस्पात के टुकड़े से चकमक पर तीव्र प्रहार करते हैं। टक्कर से उत्पन्न चिनगारी घास या रुई को पकड़ लेती है और उसी को फूँक-फूँककर और फिर पतली लकड़ी तथा सूखी पत्तियों के मध्य रखकर अग्नि का विस्तार कर लिया जाता है।
  • घर्षणविधि से अग्नि उत्पन्न करने की सबसे सरल और प्रचलित विधि लकड़ी के पटरे पर लकड़ी की छड़ रगड़ने की है।
  • एक-दूसरी विधि में लकड़ी के तख्ते में एक छिछला छेद रहता है। इस छेद पर लकड़ी की छड़ी को मथनी की तरह वेग से नचाया जाता है। प्राचीन भारत में भी इस विधि का प्रचलन था। इस यंत्र को अरणी कहते थे। छड़ी के टुकड़े को उत्तरा और तख्ते को अधरा कहा जाता था। इस विधि से अग्नि उत्पन्न करना भारत के अतिरिक्त लंका, सुमात्रा, आस्ट्रेलिया और दक्षिणी अफ्रीका में भी प्रचलित था। उत्तरी अमरीका के इंडियन तथा मध्य अमरीका के निवासी भी यह विधि काम में लाते थे। एक बार चार्ल्स डारविन ने टाहिटी (दक्षिणी प्रशांत महासागर का एक द्वीप जहाँ स्थानीय आदिवासी ही बसते हैं) में देखा कि वहाँ के निवासी इस प्रकार कुछ ही सेकंड में अग्नि उत्पन्न कर लेते हैं, यद्यपि स्वयं उसे इस काम में सफलता बहुत समय तक परिश्रम करने पर मिली।

प्रथम बार आग उत्पन्न होने की दन्त कथाएँ:-

आग के उत्पाति की कई मान्यताएं और कथाएँ प्रचलित है जो प्राचीन काल से चली आ रही है।

  • इनमे फारस के प्रसिद्ध ग्रंथ शाहनामा के अनुसार हुसेन ने एक भयंकर सर्पाकार राक्षसी से युद्ध किया और उसे मारने के लिए उन्होंने एक बड़ा पत्थर फेंका। वह पत्थर उस राक्षस को न लगकर एक चट्टान से टकराकर चूर हो गया और आग लग गई, इस प्रकार सर्वप्रथम अग्नि उत्पन्न हुई।
  • उत्तरी अमरीका की एक दंतकथा के अनुसार वहा एक विशाल भैंसे के दौड़ने पर उसके खुरों से जो टक्कर पत्थरों पर लगी उससे चिनगारियाँ निकलीं। इन चिनगारियों से भयंकर दहन भड़क उठा और इसी से मनुष्य ने सर्वप्रथम अग्नि ली।

आग कैसे बुझाएआग के विभिन्न प्रकार और उसे बुझाने के उपाय:-

  • श्रेणी A प्रकार की आग:- साधारण ठोस पदार्थों में लगनेवाली आग जैसे – लकङी, वस्त्र, कागज, घास-फूस, कूङा-करकट आदि पदार्थो में उत्पन्न आग।

आग बुझाने के साधन:- इस प्रकार की आग को बुझाने के लिए जल व रेत से भरी बॉल्टियॉ, जल की फुहार, कार्बनडाई-ऑक्साईड पैदा करने वाले अग्नि शामक यंत्र ( Fire extinguisher) प्रयोग किए जाते है।

  • श्रेणी B प्रकार की आग:- तरल पदार्थोँ मेँ लगने वाली आग जैसे- पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल, स्पिरिट, अल्कोहॉल आदि ज्वलनशील तेलीय तरल पदार्थों में लगने वाली आग।

आग बुझाने के साधन:- इस प्रकार की आग को काबू में करने के लिए झाग पैदा करने वाले अग्नि शामक यंत्र प्रयोग की जाते है। यह यंत्र से निकला झाग जलते हुए पदार्थ पर झाग की तरह फैलकर उसमे ऑक्नसीजन की सप्लाई काट देते है और 8स तरह आग बुझ जाती है।

  • श्रेणी C प्रकार की आग:- बिजली के तारो मे शार्ट सर्किट से लगने वाली आग को इस श्रेणी में रखा गया है।

आग बुझाने का साधन:- इस प्रकार की आग बुझाने के लिए सर्वप्रथम उपाय विद्युत सप्लाई का मेन स्विच ऑफ कर दिया जाता है। तथा आग को काबू में करने के लिए C.T.C. (carbon tetra chloride) प्रकार के अग्निशामक यंत्र का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार की आग बुझाने मेँ जल का प्रयोग निषिद्ध है, क्योंकि जल विद्युत की सुचालकता बढ़ा देता है और आग बुझाने वाले को विद्युत का झटका लगा सकता है।

  • श्रेणी D प्रकार की आग:- रसायनो तथा ज्वलनसील गैसों मेँ लगने वाली आग को इस श्रेणी में रखा गया है।

आग बुझाने का साधन:- इस प्रकार से रासायनिक गैसीय पदार्थो में आग लगने पर सबसे पहले गोदाम या भवन के खिङकी, दरवाजे खोल देने चाहिए। इस प्रकार गैस शीघ्र बाहर फैल जाती है और उसका जलना बंद हो जाता है। इसके अतिरिक्त इस प्रकार की आग पर काफी मात्रा मेँ रेत या मिट्टी (सूखी या गीली) डाला जाना चाहिए।

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