संदीप माहेश्वरी के सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा दायक कहानी / जिंदगी में हार मान ली है तो पढ़े ये कहानी

संदीप माहेश्वरी के सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा दायक कहानी / जिंदगी में हार मान ली है तो पढ़े ये कहानी

संदीप माहेश्वरी एक इंटरनेट पर्सनालिटी, एंटरप्रेनर, फोटोग्राफर और यूट्यूबर हैं। संदीप भारत के सबसे तेज़ उन्नति और सफलता प्राप्त करने वाले युवा उद्यमी व्यक्तियों में गिने जाते हैं। वे Imagesbazaar के फाउंडर और सीईओ हैं जो की भारतीय वस्तुओं और लोगों से जुडी हुई चित्रों और फोटो का सबसे बड़ा ऑनलाइन संग्रह है। इस वेबसाइट में 1 लाख से भी ज्यादा seभारतीय मॉडलों के फोटो का संग्रह है और इस वेबसाइट के नेटवर्क के साथ 11 हज़ार से ज्यादा फोटोग्राफर जुड़े हुए हैं। बहुत ही कम मेहनत और अपने दिमाग के बल पर जल्द से जल्द सफलता पाने के कारण उन्हें दूसरे उद्यमी व्यक्तियों से अलग माना जाता है। साथ ही वे अपने प्रेरणादायक मुफ्त के जिंदगी बदल देने वाले सेमिनार के कारण बहुत ही मशहूर हैं जिससे वे देश विदेश के जगह-जगह जा कर लोगों को प्रेरित करते हैं और प्रेरणा स्रोत बनते हैं।

संदीप माहेश्वरी का जन्म 28 सितम्बर 1980 को नई दिल्ली में हुआ था। इनके पिता का नाम रूप किशोर माहेश्वरी है तथा इनकी माता का नाम शकुंतला रानी माहेश्वरी है। संदीप माहेश्वरी दिल्ली के एक मिडिल क्लास परिवार से था जो किराए के दो कमरे के छोटे से मकान में रहता था, जब संदीप बहुत छोटे थे तब पड़ोस के एक बच्चे के पास लाल साइकिल देखकर मन मचल गया और पिता से साइकिल दिलाने की जिद्द की तो पिता से जवाब आया:- मैं कोई टाटा- बिड़ला नहीं हूँ जो इसकी सारी फ़रमाइशें पूरी करता रहूँ। ये जवाब अमूमन हर मिडिल क्लास पिता अपने बच्चो से कहता आया है जो लगभग सभी ने सुना ही होगा जो मिडिल क्लास से है।

अपने पिता के इस जवाब पर संदीप ने अपनी माँ से पूछा:- माँ ये टाटा-बिड़ला क्या होता है?

माँ ने पीछा छुड़ाते हुए कहा:- बेटा ये ऐसे लोग होते हैं जिनके पास ढेर सारे पैसे होते हैं।


तब बचपन मे संदीप माहेश्वरी ने फैसला किया कि वो बड़ा होकर टाटा-बिड़ला बनेगा। मगर लोग उसका मजाक उड़ाने लगे। जब संदीप माहेश्वरी 15-16 साल के हुए उनके पिता का 20 साल पुराना अलुमिनियम का बिजनेस था जिसके वह सहमालिक थे। इसमे उनके पार्टनर से हुई कुछ अनबन की वजह से उन्हें वो बिज़नेस छोड़ना पड़ा। ऐसे में उनके पिताजी भी डिप्रेशन में रहने लगे। ये एक बड़ा संकट था संदीप माहेश्वरी और उसका पूरा परिवार ऐसी तमाम मुसीबतो से जूझ रहा था।

संदीप माहेश्वरी को लगा कि उसे कुछ करना चाहिए, वो परिवार के साथ मिल कर छोटे-मोटे काम करने लगा। उनकी माँ ने खजूर के पान बनाये, जिन्हें उस संदीप माहेश्वरी ने बेचने की कोशिश की पर वह ज्यादा नहीं बिका। उसके बाद एसटीडी पीसीओ चलाने का प्रयास किया लेकिन वह भी नहीं चला। कॉल सेंटर और इधर-उधर इंटरव्यू दिए पर कहीं भी उनका सिलेक्शन नहीं हुआ। हर तरफ निराशा, डिस्पोइन्मेंट, उम्मीद की कोई किरण नहीं। तब तंगी के हाल में टाटा- बिड़ला बनने का ख्वाब देखने वाला लड़का अब 5-6 हज़ार की नौकरी के बारे में सोचने लगा।

संदीप माहेश्वरी जब अठारह साल के थे तब किसी के बुलाने पर वे एक एमएलएम कंपनी की सेमिनार में गए। जहाँ तीन घंटो में वहां उन्हें कुछ समझ नहीं आया लेकिन अंत में जब एक लड़के ने स्टेज पे खड़े होकर बताया कि उसकी उम्र 21 साल है और वो महीने का ढाई लाख कमाता है तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गयी, संदीप आश्चर्य में थे। उन्हें लगा जब इस 21 साल के लड़के के लिए महीने का ढाई लाख कमाना आसान है तो उनके लिए भी है। जब ये कर सकता है तो मैं भी कर सकता हूँ।

अचानक आई इस सोच ने संदीप की लाइफ हमेशा-हमेशा के लिए बदल दी। संदीप उसी घरोलु सामान बेचने वाली एमएलएम कम्पनी में सफल होने के लिए जी जान से जुट गए, लेकिन वह सफल न हो पाये। वे इसमे एक असफल रहे और जिंदगी में असफलता का स्वाद चखा। लेकिन इस बार की विफलता से वे निराश नहीं हुए। क्योकि ये काम उन्होंने दुसरे की मोटिवेशन से शुरू किया था, ये उनकी अपनी सोच और ख्वाहिश नहीं थी मतलब उनकी खुद की इच्छा नहीं थी।

इसके बाद फिर संदीप के मन में आया की मॉडलिंग कर लेता हूँ। संदीप ने कॉलेज लेवल पर मॉडलिंग शुरू की संदीप यहाँ भी सफल ना हो पाए। इसके बाद फोटोग्राफी का उनका काम कुछ चल पड़ा। महीने के 20-30 हज़ार आने लगे, पर गाड़ी आगे नहीं बढ़ रही थी। संदीप माहेश्वरी कहते हैं कि:- फोटोग्राफी में सिर्फ काम नहीं बिकता है बल्कि नाम बिकता है और अब उन्हें नाम करना था। 21-22 साल की उम्र का कोई लड़का क्या सोचता है। यही ना कि ये तो बड़ा मुश्किल है! पर संदीप तो मानते ही नहीं कि कुछ भी मुश्किल है, उनके ज़हन में ये बात बैठ चुकी थी कि सब आसान है! उनके दीमाग में आया कि एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया जाए। जिससे सब लोग उनको जान जाएं। इसके लिए उन्होंने लिम्का बुक ऑफ वर्ड रिकॉर्ड्स के ऑफिस अधिकारी से बात की।

इस पर उन अधिकारी ने संदीप को समझाया कि कोई इंडिया लेवल का रिकॉर्ड बनाओ। ये वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना मुश्किल है, इसके लिए कम से कम 100 मॉडल्स होने चाहियें जिनकी 12 घंटे के अन्दर 10,000 फोटो खींचनी होगी वो भी सब अलग-अलग पोज में।

इस बात पर संदीप माहेश्वरी ने जवाब दिया कि:- हो जाएगा, लेकिन क्या ये करना इतना आसान था, बिलकुल नहीं! इस काम मे बहुत से मुश्किलें आई मॉडल्स अरेंज करना, पैसों का इंतजाम, आदि। लेकिन अपनी धुन के पक्के संदीप माहेश्वरी के सामने एक भी मुश्किल टिक न सकी और संदीप ने 22 साल की उम्र में 2003 मे ये वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया और फिर यही से शुरू हुआ सिलसिला सफल व्यक्ति बनने का और अपने नाम को सफलता की उचाईयो पर पहुचने का।

संदीप माहेश्वरी का कहना है कि:- मैं सिर्फ गुड़ लक को मानता हूँ, बेड लक नाम की इस दुनिया में कोई चीज नहीं, क्योंकि जो होता है अच्छे के लिए होता है। इसका मतलब हमारे साथ कुछ बुरा भी हो रहा है तो बुरा लग रहा है बुरा है नहीं, आज बुरा लग रहा है आगे आने वाले टाइम पे पता चलता है कि वो भी अच्छे के लिए हुआ है।

संदीप माहेश्वरी की सफलता का सबसे बड़ा राज सिर्फ दो शब्दों में छिपा है :- आसान है । वे किसी भी चीज को मुश्किल नहीं मानते, चाहे चैलेंजेज बड़े हों या छोटे, हर बार वो यही सोचते हैं कि ये आसान है, और सचमुच वो उनके लिए आसान बन जाता है। और यही सलाह वो हर इंसान को देते हैं, उनका कहना है कि अगर किसी को उनसे सिर्फ और सिर्फ एक चीज सीखनी है तो वो है आसान है का फंडा। यदि ये फंडा आप सिख गए तो दुनिया की कोई ताकत आपको सफलता पाने से नहीं रोखा पायेगी।

संदीप माहेश्वरी का मानना है कि कामयाब होना कोई बड़ों का खेल नही ये तो बच्चों का खेल है.। और अगर तुम मान लो कि सफल होना बच्चों का खेल है तो क्या होगा,, तुम हो जाओगे…। मैं इस वजह से सफल नहीं हूँ कि कुछ लोगों को लगता है कि मैं सफल हूँ बल्कि मैं इस वजह से सक्सेसफुल हूँ क्योंकि मुझे लगता है कि मैं सक्सेजफुल हूँ।

All image and motivational source : sandeep maheshwari and his facebook page

संदीप माहेश्वरी के सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा दायक कहानी / जिंदगी में हार मान ली है तो पढ़े ये कहानी

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