तिलकेश्वर महादेव मंदिर : मेवाड़ के इस प्राचीन शिव मंदिर पर पहुँचना खतरे से खाली नही

तिलकेश्वर महादेव मंदिर : मेवाड़ के इस प्राचीन शिव मंदिर पर पहुँचना खतरे से खाली नही

देवों के देव महादेव की पसंद और नापसंद भी बिल्कुल अलग है। तिलकेश्वर महादेव देखने में भले ही किसी भी दूसरे मंदिर में विराजने वाले शिव की तरह लगें, लेकिन इनके दर्शन करना इतना आसान नहीं है। देवो के देव महादेव हमेशा दुर्लभ स्थानों, झरनों और प्राकृतिक शौन्दर्य के बीच ही बसते है और पहाड़ो में ही भगवान शिवजी का मंदिर होता है। इसी तरह मेवाड़ का उदयपुर जिले की सीमा से लगते आदिवासी क्षेत्र राई गांव में अरावली पहाड़ी में स्थित तिलकेश्वर महादेव मंदिर में आज भी श्रद्धालु सीढ़ी और लोहे की जंजीर के सहारे दर्शन करते हैं। यहां पर महादेव का दर्शन करना काफी दुर्लभ है। मेवाड़ के इस प्राचीन शिव मंदिर में भगवान महादेव के दर्शन करना किसी खतरे के खाली नही है और हल्के दिल वाले यहां कतई नहीं जा सकते। प्राकृतिक गुफा के भीतर गहरी खाई में स्थित हजारों सालों पुराने इस मंदिर के पास ही पानी का झरना बहता है एवं मंदिर में जाने के लिए लोहे की सीढ़ी और जंजीर लगाई गई है, जिनके सहारे श्रद्धालु गुफा के भीतर दर्शन करने पहुंचते हैं। इस प्राकृतिक देव स्थान पर वैसे तो हर समय दर्शनार्थियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन विशेषकर सावन भादवा महीने में श्रद्धालुओं की भीड़ अच्छी खासी रहती है।

राजस्थान के उदयपुर शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर पिंडवाड़ा हाईवे पर स्थित राई गांव में भगवान तिलकेश्वर महादेव जी का स्थान स्थित है। अरावली के घने जंगल मे बसे भगवान भोलेनाथ के इस दुर्लभ स्थान पर आने का रास्ता भी काफी दुर्लभ, रोमांच भरा है औऱ प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। उदयपुर से पिंडवाड़ा हाईवे से होते हुए तिलकेश्वर महादेव जाना अपने आप मे एक बहुत ही खूबसूरत और सुहाना सफर है। क्योंकि यहां रास्ते मे आपको प्रकृति के सुंदर नजारे और पहाड़ नजर आएंगे। इन रास्तों से जब आप कटते हुए पहाड़ो के बीच से जाएंगे तो आपको यू लगेगा जैसे प्रकृति ने डिजाइन करके इन्हें तरासा है। सड़क के दोनों ओर फैली हरयाली आपको काफी सुखद और आनंददायक अनुभूति देती है।

तिलकेश्वर महादेव मंदिर के इतिहास के बारे में वहां के क्षेत्रवासियों और पुजारी जी के अनुसार कई वर्षों पहले आदिवासी युवक की कुछ गायों का झुंड प्रतिदिन इस जगह पर उतरता था और शाम होते ही यही गायों का झुंड वापस इस संकरे रास्ते से आता था। एक दिन उसके मालिक को पता चला तो उसने गायों का पीछा किया, यह पता करने की आखिर ये गाये जाती कहा है। तब उसने देखा कि वह गाये जंगल से होते हुए सीधे इस संकरी खाई से होते हुए गुफा में पहुंच गई। तब मालिक ने चुपके से देखा तो उसे दर्शन मिले तिलकेश्वर महादेव और गाय गुफा के अंदर शिवलिंग पर दूध दे रही थी। इसके बाद से ही यहां पूजा अर्चना होने लगी। तिलकेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने वाला यह स्थान 100 फिट सीधा नीचे उतरने वाला यह रास्ता कई सारी दुर्गम कठिनाइयों से भरा है।

अरावली पहाड़ी के बीच स्थित सफेद पत्थरों पर बहते झरने के पास ही करीब 100 फीट गहरी खाई है, उसी के भीतर गुफा में तिलकेश्वर महादेव विराजमान है। गुफा तक पहुंचने के लिए कोई मार्ग नहीं होने से पत्थरों पर लोहे की जंजीर को बांधा गया है और तीन जगहों पर लोहे की सीढिय़ां लगाई गई हैं। इन सीढिय़ों के सहारे जंजीरों को पकड़ कर ही गुफा में सभी श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए जाना पड़ता है। सर्प आकार की खाई में उतरते और वापस बाहर निकलते समय पूरी सावधानी बरतनी पड़ती है। रास्ते मे बहता पानी जंगली काई को पैदा करता है जिससे श्रद्धालुओं के फिसलने का खतरा भी बहुत रहता है। यहाँ नीचे उतरने के लिए लोहे की चेन लगी हुई है जो आपको नीचे उतरने में मदद करती है। नीचे उतरते ही आपको मितली है असीम शांति और चारो तरफ शीतल जल। तिलकेश्वर महादेव मंदिर घने जंगल के बीच पहाड़ी क्षेत्र में होने से हमेशा वन्य जीवों का भय रहता है और जंजीर के सहारे गुफा में नहीं उतर पाने से महिलाएं बच्चे कम ही आते हैं।

तिलकेश्वर महादेव मंदिर : मेवाड़ के इस प्राचीन शिव मंदिर पर पहुँचना खतरे से खाली नही

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.